गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

एक पत्नी-पीड़ित की गुहार...पतिहित में जारी!(कुंवर जी)

आज मोबाइल पर एक बड़ा ही सुकून देता सन्देश प्राप्त हुआ!पढ़ कर लगा कि हमारी तरह कोई ओर भी है यहाँ!
जो भी था सोचा आप तक भी पहुंचा दूं.....




दोस्तों आज हम एक एक अजीब से प्राणी के बारे में पढेंगे...

प्रभु की इस अद्भुत कृति का नाम है "पत्नी"!

@ये अक्सर रसोई में या टीवी के आसपास पायी जाती है!
@इनका पौष्टिक और पसंदीदा आहार है..."पती का भेजा"!
@ये पानी कम "पती का खून" ज्यादा पीती है!
@इन्हें अक्सर नाराज होने का "नाटक" करते हुए देखा जा सकता है!
@इस प्राणी का सबसे खतरनाक हथियार हो "रोना" और "इमोशनली ब्लेकमेल" करना!
@इसके प्रभाव में रहने पर "तनाव" नाम की बिमारी हो सकती है जो लाइलाज होती है!
@और कोई सावधानी आपको इन से नहीं बचा सकती......
एक पत्नी-पीड़ित की गुहार...पतिहित में जारी!


आप सभी को नव वर्ष कि हार्दिक शुभकामनाये...
जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

सोमवार, 27 दिसंबर 2010

ये रात अँधेरी और सर्द तो जरुर है,पर क्या मेरे मन से भी ज्यादा...?(कुंवर जी)


ये रात अँधेरी और सर्द
तो जरुर है,
पर क्या मेरे मन से भी ज्यादा..?
जो
समेटे हुए है,
अंधड़ कितने ही,
कितने ही तुषाराघात सहे हुए है!
खुशियों के कितने ही सूरज
धुंधले-धुंधले से फिर रहे है
मेरे दुखो कि धुन्ध में!
जैसे भीख मांगते हो
कुछ पल को दिखने कि खातिर!
और आस के सूरज तो
फिर से नकलने की आस छोड़,
छिप ही चुके है!

ये रात अँधेरी और सर्द तो जरुर है,
पर क्या मेरे मन से भी ज्यादा...?


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

सब कुछ तो है.....(कुंवर जी)

सब कुछ तो है,
थोड़ी सी खुशिया,थोडा सुकून;
और थोडा सा चैन ही तो नहीं है!
और हाँ आस भी तो है!

सब कुछ तो है,
छोटी सी ज़िन्दगी,पाषाण सा तन,
और ये शिला सा स्थिर मन सब यही है!
और हाँ रुकी-रुकी सी सांस भी तो है!
देखा;सब कुछ तो है,





जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

‘मैं प्रेमचंद हूं, मुझ पर काफिर चस्पा करें।’ एक पाकिस्तानी की सनक पूरे पाकिस्तान को बदनाम कर रही है या पूरे पाकिस्तान की सोच यहाँ दिख रही है......पता नहीं!

 ये किसी नाटक का डाइलोग  नहीं बल्कि  पकिस्तान में एक हिन्दू के साथ मरणोपरांत किया गया भद्दा मजाक है... !
ऊपर दिए गए लिन्क में खबर विस्तार से दी गयी है!
पढने से साफ़ पता चल रहा है कि कुछ एक गन्दी सोच वालो की वजह से सारी कौम कैसे बदनाम हो सकती है,वे सारे प्रयास जो कि अमन,शान्ति को बढ़ावा देने वाले है....इन कु-कृत्यों के पीछे छिपे रह जाते है!एक पाकिस्तानी की सनक पूरे पाकिस्तान को बदनाम कर रही है या पूरे पाकिस्तान की सोच यहाँ दिख रही है......पता नहीं!

जो भी हो ये गलत तो है ही!क्या एक देश के नागरिक को ये ख्याल नहीं रखना चाहिए कि वो अपने देश कि गरीमा को ध्यान में रख कर ही कुछ कार्य करे,या फिर उसने इसी सोच के कारण ये काम किया,ये तो वो ही जाने!

ये एक खबर थी,पता नहीं इसके बाबत कुछ रोष या विरोध भारत सरकार के द्वारा दर्ज करवाया गया था या नहीं!शायद किसी मुस्लिम भाई के साथ ऐसी घटना हो जाती तो उच्च स्तर तक का पक्का विरोध दर्ज करवाया जाता,परइस बार वो बेचारा प्रेमचंद था ना.....तो शायद......

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

रविवार, 19 दिसंबर 2010

वो जो अपनों में पराया सा,गैरों में ख़ास क्यों है?

वो जो अपनों में पराया सा,
गैरों में ख़ास क्यों है?
सब जब पहले जैसा है तो
मन उदास क्यों है?
पलके गीली है और,
इन आँखों में प्यास क्यों है?
जीवन जीने के सपनो में,
खुद को मिटाने का भास क्यों है?
"हरदीप" आँखे खुल चुकी है,
फिर भी खुशियों की आस क्यों है?

जय हिन्द,जय श्रीराम.
कुंवर जी,


शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

क्या इसीलिए बनाया हमें भगवान् ने......??? (कुंवर जी)


बोलते-बोलते
रुक जाती है जुबाँ,
हाथ थम जाते है लिखते हुए,
दिमाग भी
सुन्न सा हो जाता है जब,
सोचता है
कि
बनाने वाले ने
बनाया है
हमें,
बस उसे पूरा
या
सिद्ध करने के लिए
जो उसने कभी
ना जाने कब
      लिख दिया था....

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

बुधवार, 8 दिसंबर 2010

अरे सब-कुछ है; बस ये भ्रम रहे......(कुंवर जी)

मै ये नहीं कहता कि हमारी मुलाक़ात हो,
हर रोज हर पल हमारी ही बात हो,
तमन्ना बस इतनी सी है कि जब दूर हो तो,
थोड़ी सी हमारी याद और थोड़े से ज़ज्बात हो!

किसने कहा कि आँखे नम रहे,
इस ज़िन्दगी से खफा  हरदम रहे,
सब-कुछ हो ये जरुरी तो नहीं यहाँ,
अरे सब-कुछ है; बस ये भ्रम रहे!



 जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

बचकानी फ़रियाद......(कुंवर जी)

कुछ

नयी बात
करनी चाही तो
सब पुरानी बातें याद आई,
चलने
लगे तो
ज़ेहन में फिर
मिलने वाली
बचकानी फ़रियाद आई!

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

ज़ख्म देख कर भी कोई सहलाता नहीं है,,,,(कुँवर जी)

ज़ख्म देख कर भी कोई सहलाता नहीं है,
नमक डालते है,इलाज़ कोई बताता नहीं है!

आँखों में आंसूं देख आँखे झुकाते मिले सब,
हौसला बढाने को भी तो कोई मुस्कुराता नहीं है!

चौराहे तक तो खूब साथ निभाया गया,
अब गलत-ठीक ही सही,राह कोई बताता नहीं है!

उनकी जरुरत के हिसाब से तो रिश्ते बहुत बने,
अपनी बारी आई,नया-पुराना कोई रिश्ता निभाता नहीं है!

चलो किसी का अच्छा किया ही नहीं हमने,
फिर सोचा,हँसे;बुरा किया हो ये भी तो याद आता नहीं है!


जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुँवर जी,

लिखिए अपनी भाषा में

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